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महिला सशक्तिकरण

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भारत एक प्रसिद्ध देश है जो प्राचीन समय से ही अपनी सभ्यता , संस्कृति , धर्म, और भोगोलिक विशेषताएँ   के लिए जाना जाता है और दूसरी और यह अपने पुरुषवादी राष्ट्र के लिए भी जाना जाता है भारत में महिलायों को पहले प्राथमिकता दी जाती है लकिन समाज और परिवार में उनके साथ बुरा व्हवार किया जाता है महिलाये हमारे समाज में महत्पूर्ण भूमिका निभाती है इसलिए  उनका सशक्तिकरण करना बहुत ही महत्पूर्ण है सशक्तिकरण से तात्पर्य है  किसी व्यक्ति से जोड़ी क्षमता  से है जिसमे उसमे यह योग्यता  आ जाती है की वह अपने जीवन से जोड़े हर फैसले ले सके महिलाये सशक्तिकरण से भी तात्पर्य इसी क्षमता  से है जिसमे वह अपने परिवार और समाज के सभी बन्धनों से मुक्त होकर अपने फैसले खुद ले  सके उनके उचित वृद्धि और विकास के लिए हर क्षेत्र  में सवतंत्र होने के उनके अधिकार को समझना महिलायों को अधिकार देना है  जिससे महिलायों की  भागीदारी उल्लेखनीय रूप से हर क्षेत्र में  बढ़ जाये गी  भारत में ऐसी बहुत सारी महिलाये है जिन्होंने अपना नाम रोशन किया है और साथ में ही देश ...

गोपालदास नीरज जी का ये गीत प्रेरणा है हमारे लिए

जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए नई ज्योति के धर नये पंख झिलमिल, उड़े मर्त्य मिट्टी गगन-स्वर्ग छू ले, लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी, निशा की गली में तिमिर राह भूले, खुले मुक्ति का वह किरण-द्वार जगमग, उषा जा न पाए, निशा आ ना पाए। जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में, कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी, मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी, कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी, चलेगा सदा नाश का खेल यों ही, भले ही दिवाली यहाँ रोज आए। जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना  अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ़ जग में, नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा, उतर क्यों न आएँ नखत सब नयन के, नहीं कर सकेंगे हृदय में उजेरा, कटेगे तभी यह अँधेरे घिरे अब स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना  अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए