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कोणार्क नाटक (समीक्षा )

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 कोणार्क नाटक जगदीश चंद्र माथुर द्वारा रचित नाटक है यह नाटक उनके प्रसिद्ध कृतियों में से एक है यह नाटक उड़ीसा में स्थित कोणार्क मंदिर के निर्माण पर आधारित नाटक  है की  किस प्रकार इस मंदिर के निर्माण में १२ वर्ष लग गए थे और किस प्रकार १२०० शिल्पियों ने मिलकर इस महान मंदिर का निर्माण किया था और उनको किन किन समस्यां का सामना करना पड़ा। यह नाटक एक सफल  नाटक के रूप में उभरकर हमारे सामने आता है इस नाटक की मदद से ही नाटककार मुखय उद्देश्य हमारे सामने लाने में सफल प्रतीत होता है इस नाटक में हमे रोचकता , स्वाभाविकता देखने को मिलती है जो पाठक वर्ग के में इस नाटक को देखने की जिज्ञासा उत्पन करता है १. कथावस्तु : कोणार्क नाटक एक ऐतिहासिक नाटक है जो हमे उड़ीसा में स्थापित कोणार्क मंदिर के निर्माण के बारे में बताते है की किस प्रकार उस समय जो शिल्पी थे और जो मुख्य शिल्पी थे उन्हें कोणार्क मंदिर के शिखर पर गुम्बद स्थापित करने में कितनी मुश्किल आ रही थी और साथ ही साथ उसमे में यह भी दिखाया है उस  समय  राजा नरेश नरसिंघ देव का राज्य था और उनके मंत्री जो महामात्य  चाल...

लगान (फिल्म समीक्षा )

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 लगान २००१ में बनी हिंदी भाषा की फिल्म है यह फिल्म आशुतोष गौरी कर की मूल कथा पर आधारित है आमिर खान इसके सहनिर्माता होने के इलावा मुख्य अभिनेता भी है यह फिल्म एक सफल फिल्म मानी जाती है इस फिल्म की तात्विक समीक्षा हम इस ब्लॉग में चर्चा करेंगे।  १. कथावस्तु : लगान फिल्म की मूल कथा हमे यह बताती है की रानी विक्टोरिया के ब्रिटानी राज की एक सूखा पीड़ित गाँव के किसानो पर कठोर ब्रिटानी लगान की कहानी है इस फिल्म का प्रारंभ चम्पारण के गाओवासी की स्थिति दिखाते  हुए हुई है की किस प्रकार वहाँ पर काफी समय से बारिश नहीं होई है यह फिल्म की कथावस्तु में हमे रोचकता,स्वाभाविकता देखने को मिलती है जिससे दर्शको के मन में इस फिल्म को देखने की जिज्ञासा उठती है २.पात्र एवं चरित्र चित्रण:  लगान फिल्म में हमे काफी पात्र देखने को मिलते है इस फिल्म के मुख्य पात्र है भुवन, कप्तान रस्सल,एलिज़ाबेथ,राजा पुराण।मुख्य पात्र के साथ -साथ गौण पात्र है जैसे लाखा, गाँववासी,आदि। इस फिल्म में हर एक पात्र का चरित्र- चित्रण दर्शक के सामने उभरकर आता है ३.देशकाल एवं वातावरण: इस फिल्म में देशकाल एवं वातावरण बिलकुल स...

तारे जमीन पर (फिल्म समीक्षा )

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तारे जमीन पर बॉलीवुड  फिल्म आमिर खान के द्वारा निर्देशित एव निर्मित की गयी है यह फिल्म सिनेमा घरो में २१ दिसम्बर २००७ को आई थी इस फिल्म में ८ साल के लड़के जिसका नाम  (ईशान अवस्थी) के जीवन और उसकी कल्पना के बारे में बताया गया है इस फिल्म में ईशान को डिस्लेक्सिया था उसकी चित्रकला में बहुत रूचि थी लेकिन वह शिक्षा में बहुत कमज़ोर होने के कारण उसके माता पिता ने उसे बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया उसके चित्रकला के शिक्षक (राम शंकर ) ने पहचान लिया था की उसे डिस्लेक्सिया है तोह उसने उसकी पढने में मदद की और उसे इस बीमारी से निकला                                                     फिल्म समीक्षा  इस फिल्म से हमे बहुत कुछ सिखने को मिलता है इस फिल्म से हमे पता चलता है की एक बच्चे  के जीवन में उसके माता पिता और शिक्षको का और उसके दोस्तों का क्या योगदान होता है यह तीनो ही एक बच्चे के जीवन में महतवपूर्ण भूमिका निभाते है शिक्षक की भूमिका :- इस...

महिला सशक्तिकरण

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भारत एक प्रसिद्ध देश है जो प्राचीन समय से ही अपनी सभ्यता , संस्कृति , धर्म, और भोगोलिक विशेषताएँ   के लिए जाना जाता है और दूसरी और यह अपने पुरुषवादी राष्ट्र के लिए भी जाना जाता है भारत में महिलायों को पहले प्राथमिकता दी जाती है लकिन समाज और परिवार में उनके साथ बुरा व्हवार किया जाता है महिलाये हमारे समाज में महत्पूर्ण भूमिका निभाती है इसलिए  उनका सशक्तिकरण करना बहुत ही महत्पूर्ण है सशक्तिकरण से तात्पर्य है  किसी व्यक्ति से जोड़ी क्षमता  से है जिसमे उसमे यह योग्यता  आ जाती है की वह अपने जीवन से जोड़े हर फैसले ले सके महिलाये सशक्तिकरण से भी तात्पर्य इसी क्षमता  से है जिसमे वह अपने परिवार और समाज के सभी बन्धनों से मुक्त होकर अपने फैसले खुद ले  सके उनके उचित वृद्धि और विकास के लिए हर क्षेत्र  में सवतंत्र होने के उनके अधिकार को समझना महिलायों को अधिकार देना है  जिससे महिलायों की  भागीदारी उल्लेखनीय रूप से हर क्षेत्र में  बढ़ जाये गी  भारत में ऐसी बहुत सारी महिलाये है जिन्होंने अपना नाम रोशन किया है और साथ में ही देश ...

गोपालदास नीरज जी का ये गीत प्रेरणा है हमारे लिए

जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए नई ज्योति के धर नये पंख झिलमिल, उड़े मर्त्य मिट्टी गगन-स्वर्ग छू ले, लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी, निशा की गली में तिमिर राह भूले, खुले मुक्ति का वह किरण-द्वार जगमग, उषा जा न पाए, निशा आ ना पाए। जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में, कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी, मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी, कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी, चलेगा सदा नाश का खेल यों ही, भले ही दिवाली यहाँ रोज आए। जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना  अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ़ जग में, नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा, उतर क्यों न आएँ नखत सब नयन के, नहीं कर सकेंगे हृदय में उजेरा, कटेगे तभी यह अँधेरे घिरे अब स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना  अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए