लगान (फिल्म समीक्षा )


 लगान २००१ में बनी हिंदी भाषा की फिल्म है यह फिल्म आशुतोष गौरी कर की मूल कथा पर आधारित है आमिर खान इसके सहनिर्माता होने के इलावा मुख्य अभिनेता भी है यह फिल्म एक सफल फिल्म मानी जाती है इस फिल्म की तात्विक समीक्षा हम इस ब्लॉग में चर्चा करेंगे। 



१. कथावस्तु :

लगान फिल्म की मूल कथा हमे यह बताती है की रानी विक्टोरिया के ब्रिटानी राज की एक सूखा पीड़ित गाँव के किसानो पर कठोर ब्रिटानी लगान की कहानी है इस फिल्म का प्रारंभ चम्पारण के गाओवासी की स्थिति दिखाते  हुए हुई है की किस प्रकार वहाँ पर काफी समय से बारिश नहीं होई है यह फिल्म की कथावस्तु में हमे रोचकता,स्वाभाविकता देखने को मिलती है जिससे दर्शको के मन में इस फिल्म को देखने की जिज्ञासा उठती है

२.पात्र एवं चरित्र चित्रण:

 लगान फिल्म में हमे काफी पात्र देखने को मिलते है इस फिल्म के मुख्य पात्र है भुवन, कप्तान रस्सल,एलिज़ाबेथ,राजा पुराण।मुख्य पात्र के साथ -साथ गौण पात्र है जैसे लाखा, गाँववासी,आदि। इस फिल्म में हर एक पात्र का चरित्र- चित्रण दर्शक के सामने उभरकर आता है

३.देशकाल एवं वातावरण:

इस फिल्म में देशकाल एवं वातावरण बिलकुल सटीक समय, स्थान और परिवेश के अनुकूल दिखाया गया है इस फिल्म में भारत में ब्रिटिश राज के समय की कहानी दिखाई है और चम्पारण गाँव की कहानी दिखाई गई है और इस फिल्म में हम देख सकते है की परिवेश बिलकुल स्थान एवं समय के अनुकूल दिखाया है जैसे गाओ के लोगो को साड़ी, लंगोट में दिखाया है वही अंग्रेज़ो का परिवेश उनकी संस्कृति के अनुकूल दिखाया है 

४.संवाद योजना:

इस फिल्म की संवाद सरल एवं स्पष्ट है जो दर्शको को आसानी से समझ में आ सकते है इस फिल्म के संवाद छोटे है जिससे कहानी को गतिशीलता मिलती है इस फिल्म के संवाद से हमे पात्रो के चरित्र का उद्घाटन भी होता है उदाहरण  के लिए : जैसे भुवन के संवादों से हमे पता चलता है की वह कितना साहसी , मददगार है वही दूसरी तरफ हम देखे तोह कप्तान रस्सल के संवादों से हमे पता चलता है की वे कितना अहंकारी चरित्र का पता चलता है और वह खुद को भारतीयों से सुप्रीम मानता है 

५.भाषा शैली:

इस फिल्म की भाषा शैली एकदम सरल एवं स्वाभाविक है जोह दर्शको को आसानी से समझ आ जाती है इस फिल्म में भाषा स्थान से अनुकूल है जैसे चम्पारण में हिंदी बोली जाती है तो फिल्म में यह दिखाया गया है इस फिल्म में भाषा को सरल रखा है ज्यादा कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं किया है जिससे दर्शको को आसानी से समझ आ जाता है चाहिए वह बच्चे हो यह फर बड़े बुजुर्ग हो सबको आसानी से समझ आ जायेगा की पात्र क्या कहना कहते है 

६. अभिनेयता:

अभिनेयता तत्व के आधार पर देखे तो यह फिल्म एक दम  अभिनय करने योग्य है इस फिल्म में उन्होंने सभी दृशय को बहुत ही ख़ूबसूरती से और प्रभाबवि दांग से दर्शाया है जिससे की  दर्शको के मन में एक छाप छोड़कर  कर जाती है पर यदि हम नाटक के अनुसार देखे तो यह फिल्म अभिनय करने योग्य तोह है पर उन्हें प्राकृतिक दृश्ये  थोड़ी मुश्किल होगी जैसे की बिजली का चमकना, राजा का हाथी  पर आना आदि। यह सब रंगमंच पर दिखाना मुश्किल हो जायेगा। 

७. उद्देश्य :

इस फिल्म के सहारे फिल्मकर हमारे सामने यह दिखाना चाहते है की किस प्रकार ब्रिटिश सरकार भारतीयों के साथ अन्याय करती थी ओर भारतीयों ने एकजुट होकर इन ब्रिटिशो का सामना किया और उन्हें हराया। इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य यह ही है की यदि  मिलाकर कुछ करने की ठान ले तोह हम मुश्किल से मुश्किल काम को भी सफल कर सकते है 

अतः ऊपर लिखे गए सभी बिंदु के आधार पर हम कह सकते है की लगान फिल्म तत्वों के आधार पर एक सफल फिल्म मानी जाती है जिसे भारतीय सिनेमा में कई पुरूस्कार मिले है 






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